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सोमवार, 14 फ़रवरी 2011

मुख्तलिफ (विभिन्न) अशआर/ranjan zaidi

आंसू बहुत हैं आँख में, प़र डर मुझे है ये/गर पड़ गया अकाल तो हम क्या करेंगे तब? / वो तमाम लोग जो हसीन है, तेरी हर नज़र का यकीन हैं / मेरी आँख उनसे है ला-बलद, तेरी बज़्म का ये कमाल है. / न तो ज़िन्दगी को कोई खो सका, न ही ज़िन्दगी को कोई पा सका , ये तो महज़ एक ख़याल है, कि मैं हूँ जहाने-दराज़ में.  / तू मेरे जिस्म की ख्वाहिश में यहाँ  तक पहुंचा / कम-से-कम अब तो मुझे चैन से रहने दे यहाँ.  / इन्तजारे-शबे-हिज्राँ भी अजब है यारब / इश्क में इतनी सजा क्यों तू दिया करता है ? उम्रे-रफ्ता पे भरोसा नहीं करना हरगिज़ / सीढियां  चढ़के चलो चाँद पे हम हो आएं. /वक़्त था जब मुझे कुछ लोग समझते थे चाँद , अब कमंदों से भी काबू में  नहीं आता चाँद.                            

कौन  हो  तुम/  जो  अभी  ख्वाब  से  जागी  भी  नहीं/और  हैरत  से  मेरी  सिम्त/   नज़र  गडाए हुए/कितनी  हैरान -परीशान/  मुझे  तकती हुई/अपनी  किस्मत  को  अंगूठी  में  सजा  लेती  हो/अपने  चेहरे   पे  कोई  लट  भी  गिरा  लेती  हो/ क्या  कहूं  वक़्त  हूँ /हर  कोई  मुझे  छल  जाता  है/  हर  जवां-साल  मेरे  गम  को/  बढ़ा  जाता है/ मैं  ज़माना  हूँ/ज़माने  की  हवा  देता  हूँ/  मैं  भी पत्थर  हूँ/  खुदाओं में बदल जाता हूँ.
बड़े गौर से किसी चीज़ को, खुले लब की तिश्नगी लिये, मेरे दोस्त किसकी तलाश है, दबे सुर में कहके देख लो ,मेरे दोनों कान हैं खुले हुए./ कोई था कभी जो मिला मुझे, वो अजीब सर्द रात थी / न तो उसने दिल की बात की, न ही मेरे लब-कुशा हुए / यूँही वक़्त बीतता गया, इसी तरह देखते हुए./न वो रात लौट के आ सकी, न ही उससे फिर मिले कभी/ मेरे दिल में अब भी मलाल है, कि उसे गले न लगा सके./
आओ ईरान  की  वादी  में  चलो हो आएं,  लोग कहते हैं कि काशान में है हुस्न बहुत. /तू न कर फिक्र खुदा तुझपे मेहरबां होगा, जो भी होगा वो तेरे वास्ते अच्छा होगा/ वो सितारा जो फलक प़र तेरी तकदीर का है, जल्द मुट्ठी में तेरे आके चमक जायेगा. इतना मायूस न हो, इतना मायूस न हो../     इस नए ज़ख्म की तारीख़ का क्या ज़िक्र करूं,

कोई आवाज़ थी जो टूट के टकराई थी.
तू मुझे शौके-दराज़ी की दुआ देता है,
वो तो खुशबू थी, दबे पाँव चली आई थी.
अब मैं समझा ग़म-ए-दौराँ में अना का मतलब,
ख़ुदकुशी क़ब्ल वो बच्चों को भी ले आई थी.


اس نئے زخم کی تاریخ کا کیا ذکر کروں



، کوئی آواز تھی جو ٹوٹ کے ٹكراي تھی


. تو مجھے شوكے -- درازی کی دعا دیتا ہ


وہ تو خوشبو تھی، دبے پاؤں چلی آئی تھی.


اب میں سمجھا غم -- اے -- دورا میں انا کا مطلب،


خودکشی قبل وہ بچوں کو بھی لے آئی تھی.



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