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रविवार, 30 जनवरी 2011

मेरा मिज़ाज भी अब/रंजन जैदी

मेरा मिज़ाज भी अब मौसमों के साथ नहीं
मेरा मिज़ाज भी अब मौसमों के साथ नहीं, नहीं हैं दोस्त, मेरी वहशतों के साथ नहीं./   गमे-हयात के किस्से सुनाएँ क्या लोगों,ज़माना आज भी रुसवाइयों के साथ नहीं./   मेरी ज़मीं का मुक़द्दर है रोज़ो-शब् जलना, यही है दर्द कि सूरज शबों के साथ नहीं./  मेरा कुसूर, मेरे कुछ गुनाह गिनवादो, या ये कहो कि, मैं अब  पस्तियों के साथ नहीं./ शजर उदास, उदासी से भर गए दरिया, अजब है वक़्त परिंदे सबों के साथ नहीं.  09415111271 http://alpst-litterature.com/

रविवार, 16 जनवरी 2011

रचनाकार की चुनौतियां / रंजन जैदी

शरीर के अंगों में आँख देखने वाली एक स्वचालित इन्द्रिय है. कैमरे के शरीर प़र जड़ी आँख को चालक द्वारा चलाना पड़ता है. इसकी प्रगति और विकास के बढ़ते चरण में हम देखते हैं कि आँख चीज़ों को व्यू-फाइंडर के ज़रिये फिल्म प़र उतारती है. किन्तु इस आँख को संचालित करने वाली आँख न केवल देखती है बल्कि देखे हुए दृश्यों को भीतर की ओर स्थित डार्क-रूम में धकेल देती है, जहाँ दृश्य विभिन्न प्रक्रियाओं से गुज़रकर  अपना सही आकार लेकर अपने ही स्थान प़र स्टिल हो जाती है. दोनों की अलग-अलग प्रक्रियाएं है किन्तु इसके बावजूद चालित आंख का कैमरे की आँख से गहरा सम्बन्ध रहता है. मिसाल के तौर प़र हमारी आंख किसी दृश्य को देखती है और उसी दृश्य को कैमरे की आँख  भी देखती है. कैमरे की आँख उसी दृश्य को अपनी नज़र से देखकर बेहद सुन्दर होने का संकेत हमारी आंख को भेजती है. हमारी आँख अब इस संकेत की सत्यता जांचने के अपने अनेक  स्नायुतन्त्रों का सहारा लेती है और जब हर जगह से क्लियरेंस मिल जाती है तो हम अत्यंत उत्सुक, उत्तेजित और भावुक होकर शटर दबा देते हैं. नकारात्मक स्थिति में कृति अनुकृति में बदल जाती है. यानी जब वस्तुएं कला रूप में ढलती हैं तो वे वही नहीं रह जातीं जो दिखाई देती हैं बल्कि उनके वे पक्ष भी दिखाई देने लगते हैं जो सामान्य-रूप से अदृश्य होते हैं. ऐसी स्थिति में परख और पहचान का रिश्ता छायाकार अथवा सृजनशील लेखक से गहरा हो जाता  है. यहीं प़र रचनाकार के समक्ष अनेक चुनौतियां भी आ खड़ी होती हैं. इनसे निपटना ही सृजनशील रचनाकार की मूल कसौटी बन जाती है.        09415111271 alpsT-litterature

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हिन्दी उपन्यास दिल , दरिया-दरिया कथाकार ; डॉ० जेड० ए० जैदी (एक) सिधौली, उत्तर प्रदेश के जिला सीतापुर की एक तहसील है. इसका छोट...

इस्मत चुगताई /Ismat Apa/Ranjan Zaidi इस्मत चुगताई यह बात बहुत कम लोग जानते हैं कि उर्दू साहित्य की

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