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बुधवार, 31 मार्च 2010

जर्मन कवि क्रिसोफ़ माइकल

जर्मन कवि क्रिसोफ़ माइकल का जन्म सन १९३५ में बर्लिन में हुआ था. यह कवि एक जर्मन होते हुए भी इस्राइली हितों का पक्षधर था. वह कवि होते हुए भी एक उपन्यासकार और पेंटर भी था. कवि के रूप में उसकी कविता एसिड ने उसे एक नयी पहचान दी. इस कविता में कवि के व्यक्तिगत अनुभव पिरोये गए हैं. इसमें हम तत्कालीन जर्मन समाज की तस्वीर बखूबी देख सकते हैं. एसिड यानी तेज़ाब,  हम इसे इसी रूप में लेते हैं किन्तु जर्मनी में एसिड को LSD Tab. लेने  के बाद जो नशा होता है, उसे कहते हैं. ये नशा जर्मनी  में मूलतः वे ही लोग करते हैं जो जीवन में हताश हो जाते हैं, या निराशा के घटाटोप में डूबने लगते हैं. एसिड कविता के सम्बन्ध में यदि यह  कहा जाए कि यह जीवन की निरर्थकता का शोकगीत है, तो गलत न होगा. यानी सम्पूर्ण जीवन मात्र एक स्वप्न से अधिक कुछ नहीं है. आलोचकों की  एक राय यह  भी है कि यह कविता बेवफाई का राग है. क्रिसोफ़ की कहानियों में भी ऐसी ही बेवफाई हर-तरफ बिखरी हुई महसूस होती है..  

मंगलवार, 30 मार्च 2010

मन की आँखें/जनार्दन मिश्र

 मैं जनता हूँ/ उजाले के दिन गए/ आखिर हम प्रकृति के नियमों से / परे कैसे हो सकते हैं?/ पर आज भी/  जब मैं चाहता हूँ/ जितना चाहता हूँ/ तुम्हें देख लेता हूँ/ बाहरी आँखों से नहीं/ मन की आँखों से/ सचमुच!/  जब तक मन की / आँखें बरकरार हैं/ उजाले में/  देखी गयी चीज़ें/ अँधेरे में भी/ हूँ-ब-बहू नज़र आती हैं.

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हिन्दी उपन्यास दिल , दरिया-दरिया कथाकार ; डॉ० जेड० ए० जैदी (एक) सिधौली, उत्तर प्रदेश के जिला सीतापुर की एक तहसील है. इसका छोट...

इस्मत चुगताई /Ismat Apa/Ranjan Zaidi इस्मत चुगताई यह बात बहुत कम लोग जानते हैं कि उर्दू साहित्य की

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