जर्मन कवि क्रिसोफ़ माइकल का जन्म सन १९३५ में बर्लिन में हुआ था. यह कवि एक जर्मन होते हुए भी इस्राइली हितों का पक्षधर था. वह कवि होते हुए भी एक उपन्यासकार और पेंटर भी था. कवि के रूप में उसकी कविता एसिड ने उसे एक नयी पहचान दी. इस कविता में कवि के व्यक्तिगत अनुभव पिरोये गए हैं. इसमें हम तत्कालीन जर्मन समाज की तस्वीर बखूबी देख सकते हैं. एसिड
यानी तेज़ाब, हम इसे इसी रूप में लेते हैं किन्तु जर्मनी में एसिड को LSD Tab. लेने के बाद जो नशा होता है, उसे कहते हैं. ये नशा जर्मनी में मूलतः वे ही लोग करते हैं जो जीवन में हताश हो जाते हैं, या निराशा के घटाटोप में डूबने लगते हैं. एसिड कविता के सम्बन्ध में यदि यह कहा जाए कि यह जीवन की निरर्थकता का शोकगीत है, तो गलत न होगा. यानी सम्पूर्ण जीवन मात्र एक स्वप्न से अधिक कुछ नहीं है. आलोचकों की एक राय यह भी है कि यह कविता बेवफाई का राग है. क्रिसोफ़ की कहानियों में भी ऐसी ही बेवफाई हर-तरफ बिखरी हुई महसूस होती है..
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