यह ब्लॉग खोजें

मंगलवार, 30 मार्च 2010

मन की आँखें/जनार्दन मिश्र

 मैं जनता हूँ/ उजाले के दिन गए/ आखिर हम प्रकृति के नियमों से / परे कैसे हो सकते हैं?/ पर आज भी/  जब मैं चाहता हूँ/ जितना चाहता हूँ/ तुम्हें देख लेता हूँ/ बाहरी आँखों से नहीं/ मन की आँखों से/ सचमुच!/  जब तक मन की / आँखें बरकरार हैं/ उजाले में/  देखी गयी चीज़ें/ अँधेरे में भी/ हूँ-ब-बहू नज़र आती हैं.

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें

COME AND JOIN ME

<a =" "></a> हिन्दी उपन्यास दिल , दरिया-दरिया कथाकार ; डॉ० जेड० ए० जैदी

हिन्दी उपन्यास दिल , दरिया-दरिया कथाकार ; डॉ० जेड० ए० जैदी (एक) सिधौली, उत्तर प्रदेश के जिला सीतापुर की एक तहसील है. इसका छोट...

इस्मत चुगताई /Ismat Apa/Ranjan Zaidi इस्मत चुगताई यह बात बहुत कम लोग जानते हैं कि उर्दू साहित्य की

मेरी ब्लॉग सूची