यह ब्लॉग खोजें

गुरुवार, 13 मई 2010

उमर खय्याम...umar khayyam/ranjan zaidi

हुस्न और इश्क की शाएरी में उमर खय्याम...की शाएरी को कालजयी साहित्य में शुमार किया जाता है. हुस्न और इश्क के बीच संवाद में प्रेमी अपनी प्रेमिका से कहता है, तुम इतनी  खूबसूरत हो जैसे उमर खाय्य्यम की कोई रुबाई. खय्याम का असली नाम गयासुद्दीन अबुल फ़तेह उमर बिन इब्राहीम उमर खय्याम था. खय्याम का अर्थ होता है खेमे (टेंट) लगाने का कारोबार करने वाला. अद्भुत बात यह है कि खय्याम ने अपनी पूरी उम्र में अपने पैतृक व्यवसाव को हाथ तक नहीं लगाया. उनके जन्म को लेकर अनेक भ्रांतियां है. लेकिन स्रोतों से पता चलता है कि खय्याम का जन्म सन  १०१९ के आस-पास ईरान स्थित निशापुर में हुआ था. हालाँकि पश्चिमी देशों के अनेक लेखकों का मानना है कि खय्याम का जन्म १८ मई १०४८ के आसपास हुआ था. यदि हम उस काल के शाही शासनकाल में झांक कर देखें तो उमर खय्याम के ही समकालीन और साथ के पढ़े हुए मित्रों में अंतर्राष्ट्रीय ख्याति के फारसी साहित्य के विद्वान दार्शनिक तूसी तत्कालीन सल्जूकी राजशाही के शीर्ष  पद (प्रधानमंत्री) प़र आसीन थे. इसी प्रकार खय्याम के एक विद्वान मित्र और थे जिनका  नाम था....हसन बिन सब्बाह. इस प्रकार अपने समय के ये तीनों विद्वान जाने-माने गुरू इमाम मूफिक के मदरसे में एक साथ पढ़ा करते थे. कहते हैं कि तूसी की प्रेरणा और आर्थिक रूप से निश्चिन्त हो जाने के उपरांत ही उमर खय्याम ने निशापुर आकर अंतर्राष्ट्रीय ख्यातार्जित पुस्तक जबरो-मुकाबला और इल्मुल-मसाहत-वाल्मकात  जैसी पुस्तकों की रचना की जिससे तत्कालीन ईरान में उन्हें अपने समय का महान दार्शनिक विद्वान  बू अली सीना सानी समझा जाने लगा. अपने मित्र की योग्यता और शोहरत की चर्चा जब तूसी ने अपने बादशाह सुल्तान मलिक शाह सल्जूकी (१०९२-१०७२) के सामने की तो बादशाह ने बिना देर किये उमर खय्याम को तलब कर अपने बहुत बड़े कैलेंडर विभाग का अध्यक्ष बना दिया. यह एक बहुत बड़ी ज़िम्मेदारी थी. यहीं प़र रह कर उमर खय्याम ने एक ऐसे आधुनिक कैलेण्डर की ईजाद की कि आजतक बड़े से बड़ा विद्वान भी  न तो कोई ऐसे कैलेण्डर का विकल्प तलाशकर पाया और न ही कोई उसकी काट ही पेश कर सका. आज भी लोग नहीं जानते कि जिस सन-ईसवी के कैलेडर को वह अपने घर में सम्मान देकर दीवार प़र टांगते हैं, उसका जनक उमर खय्याम है. इसलिए यूरोप के लोग उमर खय्याम को आज भी पश्चिम का दूत कहते हैं. वास्तविकता यह है कि उमर खय्याम अपने समय का महान दार्शनिक, ज्योतिषी, कवि, खगोलविद और प्रगतिशील साहित्यकार था. कहते हैं कि विद्वान का शरीर आग में जले या दफ़्न हो, उसके इल्म का चिराग हर युग में जलता रहता है. इसी लिये उमर खय्याम के इल्म का चिराग आज भी रोशन है.     

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें

COME AND JOIN ME

<a =" "></a> हिन्दी उपन्यास दिल , दरिया-दरिया कथाकार ; डॉ० जेड० ए० जैदी

हिन्दी उपन्यास दिल , दरिया-दरिया कथाकार ; डॉ० जेड० ए० जैदी (एक) सिधौली, उत्तर प्रदेश के जिला सीतापुर की एक तहसील है. इसका छोट...

इस्मत चुगताई /Ismat Apa/Ranjan Zaidi इस्मत चुगताई यह बात बहुत कम लोग जानते हैं कि उर्दू साहित्य की

मेरी ब्लॉग सूची