यह ब्लॉग खोजें

मंगलवार, 24 सितंबर 2013

जर्मन कहानी 'माई मटरनल-अंकल फेड'/ रंजन ज़ैदी

जर्मन कहानी 'माई  मटरनल-अंकल फेड'
र्मन कहानी 'माई में वास्तविकता और भ्रम के बीच की स्थिति दर्शाई गई है.
यह दूसरे विश्व-महायुद्ध के बाद तत्कालीन जर्मनी की आर्थिक और सामाजिक स्थितियों परिस्थितियों का यथार्थपरक-चित्रण करती एक बेहद सादगी भरी कहानी है जिसमें कोयला और फूल जैसे अनेक प्रतीकों का भी इस्तेमाल किया गया है.
'कोयला' जीवन की ऊर्जा और 'फूल' जैसे प्रतीक खुशहाली आशाओं को दर्शाते हैं
जर्मन कहानी माई  मटरनलअंकल  फेड के प्रमुख नायक अंकल फेड  द्वितीय विश्व-महायुद्ध की लड़ाई से लौटकर अपने घर आया एक ऐसा उदास रहने वाला पात्र है जिसकी सोच द्वितीय विश्वमाहयुद्ध की त्रासदी और बाद के हालात से प्रभावित होकर सिरे से ही बदल चुकी है.
उसका मानना है कि जंग हर हाल में तबाही का सामान ही लाती है.
इस कहानी के लेखक हायिंस रिश बओल  जाने-माने जर्मन लेखक हैं जिनकी कहानियाँ पहली बार १९४७ में पाठकों के सामने आईं. दी  मेड-डॉग जैसी रचना का अंग्रेजी में पहली बार अनुवाद किया गया.
 उपन्यास  दी ट्रेन वाज़ आन टाइम का प्रकाशन १९४९ में हुआ लेकिन स्नातक हायिंस बओल  को नोबल पुरस्कार सन १९७२ में दिया गया.
उम्र का लम्बा सफ़र तय कर अंततः २१ दिसंबर १९१७ में जन्मे इस महान साहित्यकार की १६ जुलाई १९८५ में मृत्यु हो गई.
http://alpst-literature.blogspot.com/

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें

COME AND JOIN ME

<a =" "></a> हिन्दी उपन्यास दिल , दरिया-दरिया कथाकार ; डॉ० जेड० ए० जैदी

हिन्दी उपन्यास दिल , दरिया-दरिया कथाकार ; डॉ० जेड० ए० जैदी (एक) सिधौली, उत्तर प्रदेश के जिला सीतापुर की एक तहसील है. इसका छोट...

इस्मत चुगताई /Ismat Apa/Ranjan Zaidi इस्मत चुगताई यह बात बहुत कम लोग जानते हैं कि उर्दू साहित्य की

मेरी ब्लॉग सूची