खेल गुड़ियों का हकीकत में बदल जायेगा,
फिर कोई ख्वाब गमे-ज़ीस्त में ढल जायेगा.
बंद मुट्ठी से निकल आये जो सूरज बाहर,
मोम का शह्र है, हर सिम्त पिघल जायेगा.
देखते - देखते सब उड़ गईं चिड़िया यां से,
अब मेरा घर भी कड़ी धूप में जल जायेगा.
एक मिटटी के प्याले की तरह उम्र कटी,
धूप की तरह रहा वक़्त निकल जायेगा.
घर की दीवारें भी बोसीदः कफ़न ओढ़े हैं,
अबकी तूफां मेरे ख्वाबों को निगल जायेगा.
हमने मायूस कमंदों से न जोड़े रिश्ते,
हिज्र की रात का ये चाँद है, ढल जायेगा.
09415111271 http://alpst-literature.blogspot.com/
फिर कोई ख्वाब गमे-ज़ीस्त में ढल जायेगा.
बंद मुट्ठी से निकल आये जो सूरज बाहर,
मोम का शह्र है, हर सिम्त पिघल जायेगा.
देखते - देखते सब उड़ गईं चिड़िया यां से,
अब मेरा घर भी कड़ी धूप में जल जायेगा.
एक मिटटी के प्याले की तरह उम्र कटी,
धूप की तरह रहा वक़्त निकल जायेगा.
घर की दीवारें भी बोसीदः कफ़न ओढ़े हैं,
अबकी तूफां मेरे ख्वाबों को निगल जायेगा.
हमने मायूस कमंदों से न जोड़े रिश्ते,
हिज्र की रात का ये चाँद है, ढल जायेगा.
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