खिड़की खोले
झाँक रहा था, कबसे पीला-पीला चाँद. दश्त में तारे
शबनम-शबनम, उसमें ही जा बैठा चाँद.
चाँद की किरनें धीरे-धीरे, नीम के पेड़पे जा बैठीं,
दूर उफ़ुक़ में डूब रहा है, मुफलिस की उम्मीद का चाँद.
इक-इक करके टूट गए सब, चूड़ी कंगन और अरमान, लेकिन आस का बंधन बाकी, इकदिन दस्तक देगा चाँद.
दर्द के झोंके धीरे-धीरे उसको कुएं तक ले आये,
उसने झाँक के देखा ऐ दिल, पानी में बैठा था चाँद.
बादे-सबा खुशबू की छागल लेकर तू गुलशन में जा.
वक्ते-सहर जब लौटके आतू, साथ में लेकर आना चाँद.
09415111271
चाँद की किरनें धीरे-धीरे, नीम के पेड़पे जा बैठीं,
दूर उफ़ुक़ में डूब रहा है, मुफलिस की उम्मीद का चाँद.
इक-इक करके टूट गए सब, चूड़ी कंगन और अरमान, लेकिन आस का बंधन बाकी, इकदिन दस्तक देगा चाँद.
दर्द के झोंके धीरे-धीरे उसको कुएं तक ले आये,
उसने झाँक के देखा ऐ दिल, पानी में बैठा था चाँद.
बादे-सबा खुशबू की छागल लेकर तू गुलशन में जा.
वक्ते-सहर जब लौटके आतू, साथ में लेकर आना चाँद.
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