मत कहो मैं मर चुका हूँ , बुत कोई मैं बन गया हूँ/ ले चलो मंदिर मुझे, देवता मैं बन चुका हूँ/ अब तलक मैं आदमी था, आदमी की बन्दिगी था/ दुःख भरी इक ज़िन्दगी था/ अब मैं ऊपर उठ चुका हूँ, देवता मैं बन चुका हूँ /कल तलक मैं पूजता था, सुख की खातिर जूझता था, अब मैं मुक्ति पा चुका हूँ, देवता मैं बन चुका हूँ. / अब किराये की न चिंता, औ' न मंहगाई का ग़म/ ग़म न सरहद का, सुनामी का, न कुछ खोने का ग़म/ आस्था का दीप अब मैं बन चुका हूँ/देवता मैं बन चुका हूँ. भूखी कौमें खुद्दारी में जीते जी मर जाती हैं/ या शुभ-लाभ का माला जप कर,गद्दारी कर जाती हैं. 09415111271 http://alpst-literature.blogspot.com/
मोहन कुमार कश्यप की नई पुस्तक का नाम है 'मरने से पहले'.
-
मो*हन कुमार कश्यप* की नई पुस्तक का नाम है* 'मरने से पहले'.* कवि
जनार्दन मिश्र के कविता संग्रह* 'मरने के बाद.' *विषय अलग हैं.
का नाम है
...
8 वर्ष पहले
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें
COME AND JOIN ME