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शनिवार, 3 जुलाई 2010

bulandiyaan/ranjan zaidi


तुमको गर चाहिए बुलंदी तो, सायबां को तलाश मत करना/जिस सितारे को ढूंढते हैं लोग, उस सितारे की तरह तुम बनना//धूपइन  खलाओं में और सूरज हैं, और सूरज में भी समंदर हैं/तुम परिंदे हो आसमां में उड़ो, बादलों पर यकीन मत करना जिस्म को जलाती है, रूह को जिलाती है/धूप इक सियासत है, इससे बेहतर है फासले रखना. कैसी  अजीब  बात  है, दो  अजनबी  मिले /कुछ  गुफ्तगू  के  साथ, खराबात  भी  हुई /फिर जिस्म एक हो गए और गुल मचल उठे /छोटा सा ये  फ़साना  है, आदम  के  ख्वाब  का/मैं छूना चाहता हूँ आसमानों को, खुदा रहमत की तू बरसात कर दे./ रुको, देखो, बुलंदी कितनी मुश्किल है, कहीं हमको ज़मीं प़र फिर न लौट आना पड़े. ....-मुझे है खबर के तेरी नज़र, मेरी दस्त-ए-हिना की है पारखी/ तू मिला मुझे तो कुछ यूँ लगा, के हवा चली है बहार की/ तू न शेर था, न ही काफिया, न अदब की  सिन्फ का किताब्चा / तू गले मिला तो  तमाम  सिन्फ, मेरी शायरी मे समां गए. कहाँ नहीं है, वो हर तरफ है /वो तुझ में मुझमें बसा हुआ है /मैं कैसे कह्दूं  कि तू खुदा है , मेरा खुदा तो हरिक जगह  है. धरती देखी, अम्बर देखे, देखे कुदरत के नज़्ज़ारे, इससे आगे और भी कुछ है, आँखों को विश्वास नहीं है./ गर वो आजाते तो रिक्क़त से मैं रोता रहता, इस बरस भी मुझे तन्हा ही लगा ईद का चाँद/मेरी पलकों से जो टूटे हैं सितारे अबके, तू छुपाले उसे आये न नज़र ईद का चाँद./ मुफलिसी ने मेरे रुखसार के रंग छीन लिए, अब किसी चाँद को मैं कैसे कहूं ईद का चाँद./ कौन हो तुम जिसे ख्वाबों से  मुहब्बत है बहुत, जिंदगी भी तो किसी ख्वाब का खमियाज़ा है./ तुम्हारी शख्सियत में कितने सारे राज़ पिन्हाँ हैं, तुम्हें देखा तो कितने लोग याद आने लगे / चेहरा है सख्त और तसव्वुर! खुदा-पनाह, देते हैं जब मिसाल तो कहते हो, क्या हुआ? /मैं जनता हूँ मुहब्बत भी एक जज्बा है,.तुम अपनी प्यास से अपना गिलास भर लेना/हरेक शय में मुहब्बत का नूर पिन्हाँ है, यकीं न हो तो जुनूं में तलाश कर लेना./ जन्नत में थे तो हमने फरिश्तों से ये कहा, मुझको ज़मीं पे भेज, वहां तू भी साथ चल / और देख, कितने फूल खिले हैं ज़मीन पर / हूरों के साथ रहके तुझे कुछ खबर नहीं, हव्वा ने कितनी हूरों को मिस्मार कर दिया./वो  कौन  है  जो  दिखा  रहा  है, हसीन  मंज़र कि  आँख  हैराँ /ज़मीं पे जिसने उतार दी है, इरम सी वादी, हयात-ए-अबदी  /उठो कि  हम  भी  झुका लें  सिर  को, यकीन  करलें  कि  इक  खुदा  है.
09415111271

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