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शनिवार, 3 जुलाई 2010

parti palarपरती पलार/ranjan zaidi

परती पलार हिंदी की एक त्रैमासिक पत्रिका है जो आश्रम रोड वार्ड न.१०, अरिया, बिहार से प्रकाशित होती है और यह उसका पांचवे वर्ष का चौथा अंक है. महेंद्र कुमार सिंह नीलम  का  गीत शायद याद तुम्हें कुछ आये और जोगेश्वर ज़ख़्मी का गीत 'ऋतु ने किया श्रृंगार'  पत्रिका के खूबसूरत गीत है. अंक में साहित्य की अनेक विधाएं देखने को मिलती हैं. एक अच्छा प्रयास कहा जा सकता है. ऐसे में जब हिंदी साहित्य के पाठकों की संख्या में निरंतर गिरावट आती जा रही हो, पाठकों की तुलना में लेखक और कवि अधिक हो गए हों, साहित्य की रणभेरी लेकर कुरुक्षेत्र में उतरना आसान काम नहीं है.साहित्य के पन्ने अख़बारों से रफ्ता-रफ्ता गायब हो गए, बड़ी पत्रिकाएं बंद हो गयीं, महानगरों के छपास के शिकारी उपन्यास और कहानी संग्रह प्रकाशित कराने के लिये जोड़तोड़ करने लगें, पुरस्कार प्राप्त करने के लिये फीसें भरने लगें, तो साफ लगने लगता है कि अब हिंदी साहित्य का पतन शुरू हो चुका है. ऐसे में दूर-दराज़ के गाँव, कस्बों और छोटे शहरों में रहने वाला साहित्यकार ही साहित्य को जिंदा रख सकता है और परती-पलार में प्रकाशित रचनाएँ इस बात की गवाही भी देती हैं.यही हमारा संबल है. यही वह आशा है जो हिंदी को जिंदा रखेगी.वर्ना दिल्ली का कथित साहित्यकार तो हिंदी को जीतेजी ही मार देगा.परती-पलार को  उम्मीद की एक किरण के रूप में देखा जा सकता है, बधाई.(मुख्य संपादक: समरेन्द्र देव, प्रधान:नमिता सिंह; आवरण:विज्ञान्व्रत/नितिन गर्ग) जनवरी-जुलाई-2010 (आप भी अपनी पत्रिका अवलोकनार्थ भेजें>पता; alpsT-litterature, 94FF,Ashiana Greens,Ahinsa Khand-II,Indira Puram,GZB-201010 NCR)                                                                                                     09415111271

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