कोलकाता. हिंदी के लब्ध-प्रतिष्ठित कथाकार शेखर जोशी को मानिक
दफ्तरी ज्ञानविभा ट्रस्ट के प्रथम चंद्रयान पुरस्कार-२०१० से सम्मानित किया गया है.
ट्रस्ट की ओर से शेखर जोशी को मानदेय के रूप में ३१,०००=०० भेंट किये गए. पुरस्कार समोराह कोलकाता के भारतीय भाषा परिषद् में आयोजित किया गया.
शेखर जोशी का जन्म सितम्बर
१९३२ में अल्मोड़ा जनपद के ओजिया गाँव में हुआ था. प्रारंभिक शिक्षा अजमेर और देहरादून में हुयी. कथा लेखन को दायित्वपूर्ण
कर्म मानने वाले जोशी हिंदी के सुपरिचित कथाकार हैं. उन्हें उ.प्र. हिंदी
संस्थान द्वारा महावीर प्रसाद द्विवेदी पुरस्कार और साहित्य भूषण
पहल सम्मान से पहले ही सम्मानित किया जा चुका है. उनकी कहानियों का विभिन्न
भारतीय भाषाओं के अलावा अंग्रेजी, चेक, रूसी, पोलिश और जापानी भाषाओँ में
भी अनुवाद किया जा चुका है. कुछ कहानियों का मंचन और दाज्यू नामक कहानी पर बाल
फिल्म सोसायटी द्वारा फिल्म का निर्माण भी किया गया है.उनकी प्रमुख प्रकाशित कृतियों में कोशी का घटवार, साथ के लोग, हलवाहा, नौरंगी बीमार है, मेरा
पहाड़, और एक पेड़ की याद ने नयी कहानी को एक नयी पहचान दी है.
पहाड़ी इलाकों की गरीबी, कठिन जीवन संघर्ष, उत्पीड़न, यातना, प्रतिरोध,
उम्मीद और निराशा से भरे औद्योगिक मजदूरों के हालात, शहरी-कस्बाई और
निम्नवर्ग के सामाजिक-नैतिक संकट और समाज में व्याप्त रूढ़िवादी परम्पराएँ जैसी समस्याओं प़र उनकी कहानियों का मूलतः फोकस रहा है.
मोहन कुमार कश्यप की नई पुस्तक का नाम है 'मरने से पहले'.
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मो*हन कुमार कश्यप* की नई पुस्तक का नाम है* 'मरने से पहले'.* कवि
जनार्दन मिश्र के कविता संग्रह* 'मरने के बाद.' *विषय अलग हैं.
का नाम है
...
8 वर्ष पहले
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