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रविवार, 14 नवंबर 2010

'टोबाटेक सिंह' प़र फ़िल्में / रंजन जैदी

कालजयी  उर्दू कहानी टोबाटेक सिंह प़र अब  बालीवुड की नज़र दौड़ रही है. सादत हसन मंटो की यह कहानी भारत पाक विभाजन के बवंडर की एक अलमनाक दास्तान बयान करती है. इस कहानी प़र फिल्म बनाने का ख्याल सबसे पहले ब्रिटिश फिल्म निर्माता निर्देशक कीन मैक मोलिन के मस्तिष्क में आया था, जिसकी स्क्रिप्ट जाने-माने उर्दू साहित्यकार  तारिक अली ने तैयार कीथी और तीन महीने की लगातार शूटिंग कर इसे पूरा किया गया था. इस फिल्म का नाम पार्टीशन था. सन १९८७ में यह टेलीफिल्म पहली बार बीबीसी नेछोटे परदे  प़र रिलीज़ की. यह एक ऐसी फिल्म थी जिसे देखकर दर्शकों के दिल भर आये थे और हिजरत के अहसास ने हिंद-पाक महाजरीनों तथा शरणार्थियों के घाव ताज़े कर दिए थे. इस फिल्म में रंग-मंच के जाने-माने कलाकारों में रोशन सेठ, जोहरा सहगल, ज़िया मोहिउद्दीन, जान श्राप्नल और सईद मिर्ज़ा ने महत्वपूर्ण भूमिका अदा की थी. इसमें लाहोर पागलखाने का सेट लन्दन में ही लगाया गया था. आश्चर्य की बात यह है कि इस फिल्म के निर्देशक ने पकिस्तान की कभी यात्रा नहीं की थी और न ही इस फिल्म की शूटिंग के लिये यूनिट के किसी भी सदस्य को पाकिस्तान जाना पड़ा था.  सन १९९५ में इसी कहानी प़र दिल्ली दूरदर्शन की निदेशक मीरा की नज़र पड़ी और उन्होंने इसपर फिल्म बनाने का बीड़ा उठाया. इसके लिये उन्होंने पाकिस्तान से वहां के मशहूर अभिनेता शुजात हाशमी को भारत आने की दावत दी जिन्होंने आगे चलकर फिल्म में सरदार टोबाटेक सिंह की भूमिका निभाई. इस फिल्म को भी काफ़ी सराहा गया. फिर, २००५ में पाकिस्तान को इस कहानी प़र फिल्म बनाने का अंग्रेजी ख्याल आया. मंटो, विभाजन के दौरान पाकिस्तान चले गए थे. लेकिन उन्हें पकिस्तान रास नहीं आया था. इस अंग्रेजी फिल्म का निर्देशन लाहौर के कीन्ज़ कालेज की अफिया मिथाईल ने किया था. यह फिल्म सर्व-प्रथम २००५ में ही अमेरिका में दिखाई गयी, जिसमें बिशन सिंह की भूमिका अभिनेता अमीर राना ने निभाई थी.  ताज़ा खबर यह है कि मंटो की उर्दू कहानी टोबाटेक सिंह  प़र अब बालीवुड फिल्म बनाएगा. इन दिनों जानेमाने अभिनेता और निर्देशक आमिर खां अपनी टीम के साथ इसी कहानी प़र जोरशोर से काम में व्यस्त हैं. निश्चय ही यह एक बेहतर कदम होगा.        .              09415111271

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