| रंजन जैदी |
मेरी दिल्ली मेरी ताकत, मेरी पहचान है तू.
जिस्म में रूह की मानिंद मेरी जान है तू !
मेरी दिल्ली, मेरी दिल्ली.मेरी दिल्ली, मेरी दिल्ली.
कितने तूफां से गुज़र आई है अपनी दिल्ली,
आँधियों से भी न घबराई है अपनी दिल्ली,
लोग आते रहे और कारवां बनता ही रहा,
देखलो फिर से हसीं लायी है अपनी दिल्ली.
मेरी दिल्ली, मेरी अज़मत, मेरा अभिमान है तू
मेरी दिल्ली, मेरी ताकत, मेरी पहचान है तू.
मेरी दिल्ली, मेरी दिल्ली..मेरी दिल्ली, मेरी दिल्ली.
कितने मौसम मेरी दिल्ली में समां जाते हैं,
कुछ तो झोंके मेरे गुलशन को जला जाते हैं,
फिर भी दिल्ली तेरी गलियों में अज़आँ होती है,
शंख के नाद फ़ज़ाओं को जगा जाते हैं.
मेरे नानक की दुआओं का गुलिस्तान है तू,
मेरी दिल्ली, मेरी ताक़त, मेरी पहचान है तू
मेरी दिल्ली, मेरी दिल्ली...मेरी दिल्ली, मेरी दिल्ली.
हर नयी सुब्ह तेरी शाम की अंगड़ाई है,
तेरी रफ़्तार में, गुफ़्तार में गहराई है,
गोद में तेरे समां जाती है दुनिया की ख़ुशी,
तू नए दौर की झंकार है, शहनाई है.
इक नए हिंद की तकदीर का ऐलान है तू.
मेरी दिल्ली मेरी ताक़त, मेरी पहचान है तू.
मेरी दिल्ली, मेरी दिल्ली, मेरी दिल्ली, मेरी दिल्ली.
खेल ही खेल में अब आओ मुहब्बत कर लें,
सारी दुनिया को अहिंसा का सबक हम दे दें,
जीत और हार तो इस खेल की चौगानें हैं,
खेल के नाम पे दुश्मन को भी अपना कर लें
मेरे भारत के हसीं ख्वाब का गुलदान है तू,
मेरी दिल्ली, मेरी ताक़त, मेरी पहचान है तू.
मेरी दिल्ली, मेरी दिल्ली....मेरी दिल्ली, मेरी दिल्ली.
09415111271 AlpsT-Litterature
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