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शुक्रवार, 29 अक्टूबर 2010

वह अमरीकी लड़की/ धूप की उम्र -रंजन जैदी

वह नाज़ुक सी अमेरिकी लड़की---/ ज़ुनैन-कैम्प के दरवाजे प़र खड़ी/ इस्राएली बुलडोजरों को / अपने नाज़ुक हाथों से रोकना चाहती है ./ कैम्प में बूढ़े भी हैं, बच्चे भी./जवान भी हैं, बीमार भी./औरतें भी हैं/ सपने देखने वाली जवान लडकियां भी/कैम्प फिलिस्तीनी शरणार्थियों का है/कांपते-थरथराते बदन/असमान कीओर उठे हुए/ खुदा से दुआ मांगते हाथ/मुसल्ले प़र झुकी हुई औरतें/रहम की भीख मांगते, आयतें बुदबुदाते बुज़ुर्ग/ बच्चों की आँखों में मासूम आतंक भरे सवाल/इस्राईली क्यों दुश्मन हैं? / अमेरिकी लड़की की आँखों में भी आश्चर्य है/बुश इस्राईल को / ऐसा समर्थन कैसे दे सकता है?/....और ब्लेयर?/ यहूदियों ने तो अंग्रेजों को निकाला था/ यह बात और है कि..../ अंग्रेजों ने ही उन्हें बसाया था/ फिलिस्तीनियों को घर से निकाला था /  यह दो सभ्यताओं की जंग थी / सदियों से जंग जारी थी / इसाई धर्म में आस्था रखने वाले / टॉम हार्न की डायरी के पन्ने फडफडाते हैं / शब्द, निकल-निकलकर चीत्कारते हैं/ बुश अपराधी है/ ब्लेयर अपराधी है/ नाटो के देश भी/ अमेरिकी  लड़की हतप्रभ / टाम-हार्न गलत नहीं है / ब्रिटेन-अमेरिका के अवाम / हत्यारे नहीं हो सकते /मानवता की हत्या नहीं कर सकते / ये मुल्क हमारे हैं / हम एक नयी दुनिया के सर्जक हरकारे हैं / युद्ध अपराधियों प़र / खुली अदालत में मुकद्दमा चलाओ / इन अपराधियों को सूली प़र चढाओ / टॉम हार्न की डायरी के पन्ने फिर फडफडाते हैं/ बेटी संभल / हत्यारे बढ़ते आरहे हैं/ बुलडोज़र गडगडाते  आ रहे हैं / इनकी  आवाजें दीवारे-गिरिया से बुलंद है/ इनकी अक्लें कुंद हैं / रेत के बगूले फडफडाते हैं / इस्राएली बुलडोज़र----/ अमरीकी लड़की की परवाह न कर / उसपर से गुज़रते हुए /  फिलिस्तीनियों की ओर बढ़ जाते हैंसंस्कृतियों का लहू / रेत से लिपट जाता है / ज़ुनैन-कैम्प चीखों से भर जाता है/ अमेरिकी लड़की / बुलडोज़र के नीचे से निकलकर / दौड़-दौड़कर /  औरतों, बच्चों और ज़ख़्मी बूढों को----/  बचाना चाहती है / प़र नहीं!/  उसके हाथों से सब कुछ फिसल जाता है / घायलों का लहू भी / रेत से लिपट जाता है./ बेबसी से वह चिल्लाती है  / तभी उसे / टाम-हार्न की डायरी नज़र आती है  / डायरी समझाती है--- / तुम मर चुकी हो / मेरी तरह कविता बन चुकी हो / ऊपर देखो / खूंखार परिंदों का झुण्ड आ रहा है / एक परिंदा तो तुम्हें खा  रहा है / अमेरिकी लड़की घुटनों के बल/ रेत में धंस जाती है / बेहद निराश और हताश हो  /  चिल्ला उठती है./  हिटलर के अट्टहास गूँज उठते है / गैस-चेंबर से निकल-निकलकर लाशें / चलती हुई/ करीब आकर उसे घेर लेती हैं/ ज़ुनैन-कैम्प प़र रेत की परतें / चढ़ जाती हैं / परिंदे! लाशों को खाकर लौट रहे हैं /  इस्राईली सैनिक--- जवान जिस्मों को टटोल रहे हैं /  ज़ुनैन-कैम्प की सभ्यता  / मिटती जयेगी / लायिसेंस्शुदा आतंकियों के हाथों / दुनिया भर में फैलती जाएगी / कभी हिटलर आयेगा तो कभी बुश / कभी ब्लेयर आयेगा तो कभी कोई और /सभ्यताओं के बगूले उठते / पिरामिड बनाते रहेंगे /   पुरातत्ववेत्ता आते / खुदाई करते रहेंगे /  सच को झूठ, झूठ  को सच बताते  रहेंगे/ अमेरिकी लड़की के हाथों से / सबकुछ फिसलता रहेगा / टाम-हार्न की डायरी का हर पन्ना / इसी तरह फडफडाता रहेगा.  

धूप की उम्र/2             
तुम नहीं जानते        
टाम हार्न डाल कौन था                            
वह न फिलिस्तीनी था, न अरब!  
वह न कौम का लीडर था,                                 न मीडिया-रिपोर्टर!             
वह फूलती साँसों के साथ,                                भाग रहा था------       
रफा के फिलिस्तीनी कैम्प के एक बच्चे को                    गोद में लिए हुए   
लाऊडस्पीकर पर चीखता हुआ    
आग मत बरसाओ    
यहूदियो! आग मत बरसाओ    
प्लीज़डोंट शूट!       
लेकिन वह लहू-लुहान होकर गिर पड़ा     
उसने आसमान पर देखा           
धूप की चादर ने उसे ढ़क लिया था          
वह उठा, बच्चे को गोद में लिए कैम्प पहुँचा            
वह फिर गिरा और माँ को आवाज़ दी        
माँ! मैंने दूध का हक अदा कर दिया     
अंग्रेजों को शर्मिंदा नहीं किया    
मैं जानता हूँ-----            
एक दिन कोई अँगरेज़ आएगा  
फिलिस्तीनियों को बतायेगा                               क़ि-धूप की उम्र नहीं होती है..                              धूप की उम्र नहीं होती है।                                                                                                        09415111271 alpst-literature
          




  

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